शिव-पार्वती संवाद कथा (भाग 46)सीता-स्वयंवर—श्रीराम-सीता का अयोध्या आगमन

 श्री सीता-राम का अयोध्या आगमन


अयोध्या में श्रीराम और माता सीता का भव्य आगमन, पुष्प वर्षा और उत्सव मनाते भक्तों का दिव्य दृश्य



 


प्रस्तावना: रामजन्म के अलौकिक कारण 🌟✨

(आप सभी ने इसके पहले के पृष्ठों पर भगवान रामजन्म के 5 कारण पढ़े ,जो शिवजी ने माता पार्वती को सुनाए। इन्हीं कारणों के परिणाम स्वरुप भगवान श्री राम ने अयोध्या में अवतार लिया ।)


📚 पूर्व कथाओं की झलक (पिछले भाग की लिंक)



 

इससे पहले के पृष्ठ पर आप सभी ने श्री सीताराम- विवाह प्रसंग पढ़ा । आशा है कि आप सभी को श्री सीताराम-विवाह प्रसंग पढ़कर बहुत आनंद आया होगा!

 आइए, अब इस कथा को आगे बढ़ाते हैं-

🚩 विवाह के बाद श्रीराम-सीता का अयोध्या आगमन :

गोस्वामी जी लिखते हैं—

कहेउ भूप जिमि भयउ बिबाहू । सुनि सुनि हरषु होत सब काहू ॥

जनक राज गुन सीलु बड़ाई । प्रीति रीति संपदा सुहाई ॥

  विवाह के बाद प्रभु श्री राम सीता मैया के साथ अयोध्या धाम वापस आए। चक्रवर्ती जी रनिवास (महल) में तीनों रानियों को श्री सीताराम- विवाह का प्रसंग सुनाते हैं कि किस प्रकार से धनुष टूटा और किस प्रकार से विवाह संपन्न हुआ! मिथिला नरेश जनक जी के  की प्रशंसा करते हैं। 


गोस्वामी जी लिखते हैं—

नृप सब भाँति सबहि सनमानी।कहि मृदु बचन बोलाईं रानी॥

बधू लरिकनीं पर घर आईं । राखेहु नयन पलक की नाई ॥ 

राजा दशरथ जी तीनों रानियों को बुलाकर कहते हैं— 
"बहुएँ अभी बच्ची हैं, पराए घर आई हैं । इनको इस तरह से रखना जैसे नेत्रों को पलकें रखती हैं |जैसे पलकें नेत्रों की सब प्रकार से रक्षा करती हैं और उन्हें सुख पहुँचाती हैं, वैसे ही इनको सुख पहुँचाना ।"

और फिर बोले कि बच्चे (लरिका) भी थके हुए नींद में है इन्हें भी ले जाकर विश्राम कराओ। राजा दशरथ जी भी विश्राम करने चले गए।

रानियाँ बहुओं को लेकर विश्राम करने गई और श्री राम जी अपने भाइयों के साथ विश्राम करने गए, तो पीछे-पीछे माता कौशल्या भी गई और एकांत में राम जी से बोली— 

( यहाँ एक बात स्पष्ट की जा रही है कि माता कौशल्या ही जानती हैं और मानती भी हैं कि मेरा राम भगवान है, ब्रह्म है। किंतु राजा दशरथ नहीं मानते । राजा दशरथ जी जानते हैं कि उनके राम भगवान है किंतु वे मानते नहीं हैं। क्योंकि मनु जी ने श्री हरि से वरदान में माँगा था कि "आप जब मेरे घर में पुत्र बनकर आएं तब मैं आपको भगवान ना  मानूं , पुत्र ही मानूं ।" इसलिए राजा दशरथ जी जानते हैं किन्तु मानते नहीं)

माता कौशल्या ने कहा—

 "राम आप भगवान है ना! एक बात ब्रह्मा जी से कह दीजिएगा -

जिस दिन विश्वामित्र जी आपको लेकर अयोध्या से गए थे। उस दिन से लेकर आज तक जितने भी दिन बीते हैं, ब्रह्मा जी मेरी आयु में न जोड़ें। "

श्री राम जी ने पूछा—  "क्यों मैया ?"

तो माता कौशल्या ने कहा—

 "राम! जितने दिन आपको देखे बिना बीत गए वो दिन व्यर्थ हो गए हैं।"

जे दिन गए तुम्हहि बिनु देखें । ते बिरंचि जनि पारहिं लेखें ॥ 


अगले दिन प्रात काल में शुभ मुहूर्त देखकर कंकन (कलावा) जो विवाह के समय बांधा जाता है, छुड़ाया गया।


मुनि विश्वामित्र जी श्री सीताराम-विवाह के पश्चात अयोध्या में एक सप्ताह तक रहे। एक सप्ताह के बाद विश्वामित्र जी ने महाराज दशरथ जी से विदा मांगी।  राजा दशरथ अपनी तीनों रानियों, पुत्र और वधुओं के साथ हाथ जोड़कर खड़े हो गए  और बोले—

नाथ सकल संपदा तुम्हारी । मैं सेवकु समेत सुत नारी ॥

करब सदा लरिकन्ह पर छोहू । दरसनु देत रहब मुनि मोहू ॥

"हे नाथ ! मेरे जीवन की सारी संपत्ति आपकी है" 

महाराज दशरथ ऐसा क्यों कह रहे हैं? क्या महाराज दशरथ पहले गरीब थे ?

नहीं, महाराज कह रहे हैं कि आप आए और आपके कारण मेरे घर में चार-चार बहुएँ भी आ गई। अब इससे बड़ा सुख और ऐश्वर्य जीवन में और क्या होगा!

"हे नाथ! मैं अपने पूरे परिवार के साथ आपका सेवक हूँ।"

 इसके बाद वाली बात दशरथ जी ने बड़ी ही अद्भुत की है कि "मैं चौथेपन में आ गया हूँ। मेरे जीवन का कोई भरोसा नहीं है। इसलिए मेरे इस संसार से चले जाने के बाद भी बच्चों पर कृपा-दृष्टि रखिएगा और जब तक मैं जीवित हूँ, दर्शन देने के लिए कभी-कभी आ जाया कीजिएगा।"


📿 महात्माओं से क्या माँगना चाहिए?

( कभी भी किसी भी महात्मा के पास अगर जाइएगा तो अपने व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर मत पूछिएगा उनसे बल्कि यह पूछिएगा कि

 * विपत्ति में भी ईश्वर पर से भरोसा कम ना हो- यह उपाय बताइए।

* जीवन की स्थिति-परिस्थिति बदलती रहे लेकिन मेरे मन की स्थिति कभी ना बदले- यह उपाय बताइए ।

* जीवन के झंझटों में फँसे रहकर भी भगवान का नाम लेते रहे- यह उपाय बताइए।)

आशीर्वाद देकर,  विदा लेकर मुनि विश्वामित्र जी  गए ।


📜 बामदेव जी द्वारा मुनि विश्वामित्र की महिमा का वर्णन :


बामदेव रघुकुल गुर ग्यानी । बहुरि गाधिसुत कथा बखानी ॥

बामदेव जी जो गुरु वशिष्ठ जी के पुत्र हैं,  उन्होंने महाराज दशरथ जी को मुनि विश्वामित्र जी के बारे में बताया, उनके गुणों का बखान किया। 

गोस्वामी जी लिखते हैं —

आए ब्याहि रामु घर जब तें । बसइ अनंद अवध सब तब तें।

प्रभु बिबाहँ जस भयउ उछाहू । सकहिं न बरनि गिरा अहिनाहू ॥ 

जब से श्री रामचन्द्रजी विवाह करके घर आए, तब से सब प्रकार का आनंद अयोध्या में आकर बसने लगा ।श्री सीताराम-विवाह के आनंद और उत्साह का बखान तो  सरस्वती जी और सर्पों के राजा शेषजी भी कहने में असमर्थ हैं । 


🌊 श्रीरामचरित की महिमा का वर्णन :

गोस्वामी जी बालकांड की कथा पूर्ण करते हुए लिखते हैं —

निज गिरा पावनि करन कारन राम जसु तुलसीं कह्यो ।

रघुबीर चरित अपार बारिधि पारु कबि कौनें लह्यो ॥

मैंने अपनी वाणी को पवित्र करने के लिए श्री सीतारामजी के यश को कहा है।श्री रघुनाथजी का चरित्र तो अपार समुद्र है।इसका गुणगान कोई कैसे कर सकता है!


🙏 श्रीरामचरितमानस का आध्यात्मिक संदेश :

गोस्वामी जी लिखते हैं 

उपबीत ब्याह उछाह मंगल सुनि जे सादर गावहीं ।

बैदेहि राम प्रसाद ते जन सर्बदा सुखु पावहीं ॥

 सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं ।

तिन्ह कहुँ सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु ॥

प्रभु श्रीराम जी के जन्म, नामकरण, यज्ञोपवीत और विवाह के मंगलमय उत्सव का वर्णन आदर के साथ सुनेंगे, गाएंगे, वे लोग श्री जानकीजी और श्रीराम जी की कृपा से सदा सुख पाएंगे, इसमे कोई संशय नहीं है।


🕉️ बालकांड का मंगलमय समापन :

इति श्रीमद्रामचरितमानसे सकलकलिकलुषविध्वंसने प्रथमः सोपानः समाप्तः ।

कलियुग के सम्पूर्ण पापों को विध्वंस करने वाले श्री रामचरित मानस का यह पहला सोपान समाप्त हुआ ॥

❓ FAQ — श्री सीताराम का अयोध्या आगमन (Complete Guide)

1️⃣ बामदेव जी किन के पुत्र हैं ?
बामदेव जी गुरु वशिष्ठ जी के पुत्र हैं ।

2️⃣ गाधिसुत कौन हैॅ ?
 मुनि विश्वामित्र जी के पिता का नाम राजा गाधि था इसीलिए मुनि विश्वामित्र जी को गाधिसुत के नाम से जाना जाता है। 

3️⃣ महाराज दशरथ ने रानियों से क्या कहा था?

महाराज दशरथ ने रानियों से कहा था कि नई बहुओं को नेत्रों की पलक की तरह स्नेह और सुरक्षा देना।

4️⃣ माता कौशल्या ने श्रीराम से क्या कहा था?
माता कौशल्या ने भावुक होकर कहा था कि जिन दिनों उन्होंने श्रीराम के दर्शन नहीं किए, वे दिन व्यर्थ थे।

5️⃣ विवाह के बाद ‘कंकन छुड़ाने’ की रस्म क्या होती है?
कंकन छुड़ाने की रस्म विवाह के बाद शुभ मुहूर्त में किया जाने वाला पारंपरिक वैदिक संस्कार है।

6️⃣ मुनि विश्वामित्र अयोध्या में कितने दिन रुके थे?
श्री सीताराम विवाह के बाद मुनि विश्वामित्र जी लगभग एक सप्ताह तक अयोध्या में रुके थे।

7️⃣ श्रीराम-विवाह के बाद अयोध्या का वातावरण कैसा था?
श्रीराम और माता सीता के अयोध्या आगमन के बाद पूरी अयोध्या आनंद, उत्सव और मंगलमय वातावरण से भर गई थी।

8️⃣ श्रीरामचरितमानस के बालकांड का समापन कैसे हुआ?
बालकांड का समापन श्रीराम-सीता विवाह, अयोध्या आगमन और मंगलमय उत्सव के वर्णन के साथ हुआ है।

9️⃣ श्रीराम-विवाह कथा सुनने का क्या फल बताया गया है?
गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार श्रद्धा से श्रीराम-विवाह कथा सुनने और गाने से जीवन में सुख, मंगल और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

🔟 श्री सीताराम के अयोध्या आगमन का आध्यात्मिक संदेश क्या है?
यह प्रसंग प्रेम, मर्यादा, परिवार, सेवा और ईश्वर भक्ति के महत्व को दर्शाता है।



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