शिव-पार्वती संवाद कथा (भाग 42)सीता-स्वयंवर—मुनि विश्वामित्र जी के साथ श्रीराम-लक्ष्मण का रंगभूमि में आगमन
सीता-स्वयंवर— मुनि विश्वामित्र जी के साथ श्रीराम-लक्ष्मण का रंगभूमि में आगमन :
प्रस्तावना: रामजन्म के अलौकिक कारण 🌟✨
(आप सभी ने इसके पहले के पृष्ठों पर भगवान रामजन्म के 5 कारण पढ़े ,जो शिवजी ने माता पार्वती को सुनाए। इन्हीं कारणों के परिणाम स्वरुप भगवान श्री राम ने अयोध्या में अवतार लिया ।)
📚 पूर्व कथाओं की झलक (पिछले भाग की लिंक)
👉 भाग 14 पढ़ें : राम अवतार का दूसरा कारण (वृंदा का श्राप)
👉 भाग 15 पढ़ें : राम अवतार का तीसरा कारण (नारद अभिमान)
🔸 प्रस्तावना: पुष्पवाटिका प्रसंग के पश्चात कथा:
🔸 सीता-स्वयंवर का शुभ दिन और महाराज जनक की तैयारी :
विशेष > शतानंद जी महर्षि गौतम और माता अहल्या के पुत्र थे। वे महाराज जनक के राजपुरोहित तथा विद्वान ऋषि थे। वे ज्ञान, शास्त्र और धर्म में निष्णात थे। महाराज जनक के आदेश पर शतानंद जी ने मुनि विश्वामित्र को श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सम्मानपूर्वक रंगभूमि में आमंत्रित किया। रामकथा में वे मर्यादा, शिष्टाचार और गुरु-सम्मान के प्रतीक माने जाते हैं।
🔸 भाव के अनुसार प्रभु श्रीराम के विविध दर्शन:
🔸 रंगभूमि में सर्वोच्च आसन पर राम-लक्ष्मण :
🔸 सखियों सहित माता सीता का रंगभूमि में प्रवेश :
🔸 सीता माता का अलौकिक सौंदर्य और जनक-सभा :
🔸 बंदीजन द्वारा राजा जनक का प्रण :
🔸 शिव-धनुष (पिनाक) उठाने का आह्वान :
🔸 राजाओं का असफल प्रयास :
❓ FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1️⃣ यह प्रसंग किस कथा से संबंधित है?
यह प्रसंग शिव-पार्वती संवाद कथा के अंतर्गत सीता-स्वयंवर एवं धनुष-यज्ञ वाले दिन श्रीराम-लक्ष्मण के रंगभूमि में आगमन से संबंधित है।
2️⃣ राजा जनक ने शतानंद जी को क्यों बुलाया?
राजा जनक ने शतानंद जी को इसलिए बुलाया ताकि वे मुनि विश्वामित्र जी को श्रीराम और लक्ष्मण सहित आदरपूर्वक रंगभूमि में ले आएँ।
3️⃣ रंगभूमि में प्रवेश करते समय श्रीराम जी लोगों को अलग-अलग रूपों में क्यों दिखाई दिए?
प्रत्येक व्यक्ति की जैसी भावना थी, प्रभु श्रीराम जी उन्हें उसी भावना के अनुसार दिखाई दिए — वीरों को वीर, भक्तों को ईश्वर और मिथिला वासियों को अपने परिजन के रूप में।
4️⃣ रंगभूमि में श्रीराम और लक्ष्मण जी को कहाँ बैठाया गया?
श्रीराम और लक्ष्मण जी को मुनि विश्वामित्र जी के साथ रंगभूमि के सर्वोच्च और सुंदर आसन पर विराजमान किया गया।
5️⃣ सीता जी रंगभूमि में कैसे प्रवेश करती हैं?
सीता जी हाथों में जयमाल लिए सखियों सहित रंगभूमि में प्रवेश करती हैं, और उनके अलौकिक सौंदर्य को देखकर सभी नर-नारी मोहित हो जाते हैं।
6️⃣ बंदीजन रंगभूमि में क्या घोषणा करते हैं?
बंदीजन सभा में राजा जनक का प्रण सुनाते हैं कि जो भी शिवजी के पिनाक धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाकर तोड़ेगा, उसी से माता सीता का विवाह होगा।
7️⃣ शतानंद जी कौन थे?
शतानंद जी महर्षि गौतम और माता अहल्या के पुत्र थे। वे राजा जनक के राजपुरोहित तथा विद्वान ऋषि थे।
8️⃣ बंदीजन किसे कहते हैं?
बंदीजन वे दरबारी कवि होते थे, जो राजाओं की कीर्ति, वंश और प्रतिज्ञाओं का सभा में गान करते थे।
9️⃣ बिरिदावली का अर्थ क्या है?
बिरिदावली का अर्थ है — राजा या वंश की कीर्ति, यश और मर्यादा का क्रमबद्ध वर्णन।
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जय श्री राम 🙏
ReplyDeleteजय श्री हनुमान 🙏 स्तुत्य प्रयास 👌👌🌹
Jai shree Ram
ReplyDeleteJai jai shree ram
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