शिव-पार्वती संवाद कथा (भाग 42)सीता-स्वयंवर—मुनि विश्वामित्र जी के साथ श्रीराम-लक्ष्मण का रंगभूमि में आगमन

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सीता-स्वयंवर— मुनि विश्वामित्र जी के साथ श्रीराम-लक्ष्मण का रंगभूमि में आगमन : प्रस्तावना: रामजन्म के अलौकिक कारण 🌟✨ (आप सभी ने इसके पहले के पृष्ठों पर भगवान रामजन्म के 5 कारण पढ़े ,जो शिवजी ने माता पार्वती को सुनाए। इन्हीं कारणों के परिणाम स्वरुप भगवान श्री राम ने अयोध्या में अवतार लिया ।) 📚 पूर्व कथाओं की झलक (पिछले भाग की लिंक) 👉 भाग 13 पढ़ें : राम अवतार का प्रथम कारण (जय-विजय का श्राप) 👉 भाग 14 पढ़ें : राम अवतार का दूसरा कारण (वृंदा का श्राप) 👉 भाग 15 पढ़ें : राम अवतार का तीसरा कारण (नारद अभिमान) 👉 भाग 24 पढ़ें : राम अवतार का चौथा कारण (मनु-शतरूपा तप)  👉 भाग 29 पढ़ें : राम अवतार का पाँचवाँ कारण (प्रतापभानु कथा) 🔸 प्रस्तावना: पुष्पवाटिका प्रसंग के पश्चात कथा: (इससे पूर्व के पृष्ठ पर आप सब ने पुष्पवाटिका प्रसंग पढ़ा। जानकी जी को माता पार्वती मनचाहा वर प्राप्त करने का आशीर्वाद देती हैं और मुनि विश्वामित्र जी भी श्रीराम जी और लक्ष्मण जी को उनके सभी मनोरथ सिद्ध/पूर्ण होने का आशीर्वाद देते हैं। ) आइए, आगे की कथा की ओर बढ़ते हैं— ?...

शिव-पार्वती संवाद कथा (भाग-12): भगवान के विविध अवतारों का रहस्य

भगवान के विविध अवतारों का रहस्य


"शिवजी माता पार्वती को भगवान राम के अवतार रहस्य समझाते हुए — शिव-पार्वती संवाद चित्र (भाग-12)"


🌸 पार्वतीजी का दूसरा प्रश्न — "रामजी सदैव मनुष्य रूप में ही क्यों अवतार लेते हैं?"


 पार्वती जी ने कहा —

 "नाथ! मेरा यह भ्रम तो समाप्त हो गया है कि राम जी एक ही हैं, लेकिन मेरा दूसरा प्रश्न भी है —

 "राम जी सदैव मनुष्य रूप में ही क्यों अवतार लेते हैं ?"


🕉️ धर्म की हानि और भगवान का अवतार — शिवजी का उत्तर


तुलसीदास जी लिखते हैं —

जब जब होई धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी॥

करहिं अनीति जाइ नहिं बरनी। सीदहिं बिप्र धेनु सुर धरनी॥

तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा। हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा॥


शंकर भगवान ने कारण बताया —

जैसा कुछ मेरी समझ में आता है, हे सुमुखि! वही कारण मैं आपको सुनाता हूँ। 

 "देवी ! जब-जब धर्म का ह्रास होता है और नीच अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं। जब धरती पर असुर ,अधम, अत्याचारी बढ़ जाते हैं । अर्थात धर्म को मानने वाले कम और अधर्म को मानने वालों की संख्या बढ़ जाती है।

 गौ माता पर , ब्राह्मण पर ,संत पर और धरती पर जब अत्याचार होता है, तब भगवान विविध रूपों में अवतार लेते हैं और सज्जनों की पीड़ा हरते हैं।


 विशेष

यहाँ ध्यान दीजिएगा कि प्रभु के दशावतार उनके अंश-रूप में होते हैं । यहाँ भगवान ने विविध रूपों में अवतार लिए हैं ; केवल मनुष्य रूप में ही नहीं । भगवान ने 5 रूपों में अवतार लिया है । माता पार्वती के पूछने पर शिवजी ने केवल राम जी के अवतार के बारे में ही विस्तारपूर्वक बताया है । )


🐗 अंशावतार: वराह, हयग्रीव, कच्छप और मत्स्य के रूप में अवतार :

पहला अवतार  है —   अंशावतार 

भगवान अंश से आते हैं । भगवान का थोड़ा अंश होता है। इस अंशावतार मे वराह भगवान, हयग्रीव भगवान ,कच्छप भगवान, मत्स्य भगवान ने अवतार लिया। 


🕊️ आवेशावतार: परशुराम और बुद्ध भगवान के अवतार :

दूसरा अवतार है —   आवेशावतार । 

जिसमें भगवान बुद्ध ,भगवान परशुराम ने अवतार लिया। 


🦁 विशिष्ट अवतार: नृसिंह भगवान का प्राकट्य

तीसरा अवतार है —  विशिष्ट अवतार । 

भगवान नृसिंह ने अवतार लिया ।


🌺 पूर्णावतार: श्रीराम और श्रीकृष्ण का अवतार

चौथा अवतार है —   पूर्ण अवतार । 

जिसमें पहला पूर्ण अवतार त्रेतायुग में श्री राम जी ने और दूसरा पूर्ण अवतार द्वापर में श्री कृष्ण जी ने अवतार लिया है। तीसरा पूर्ण अवतार (कलियुग के चौथे चरण में होगा 'भगवान कल्की' के रूप में)।


🌟 महापुरुष अवतार: धर्म प्रचार हेतु भगवान का अंशावतरण :

 पाँचवा अवतार है —  महापुरुष अवतार ।

 पृथ्वी पर जितने महापुरुष हुए हैं उनमें भी भगवान का अंश होता है, जो पृथ्वी पर आकर भगवान का और धर्म का प्रचार करते हैं।


 भगवान शंकर ने श्री राम जी के अवतार के अनेक कारणों में से पाँच कारण सुनाए हैं, जिनके बारे में विस्तृत जानकारी — 


शेष अगले पृष्ठ पर.....



        पिछला भाग 11 पढ़ने के लिए क्लिक करें

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