शिव-पार्वती संवाद कथा (भाग 44)सीता-स्वयंवर—परशुराम-लक्ष्मण-संवाद
देहउँ श्राप कि मरिहउँ जाई। जगत मोरि उपहास कराई॥
बीचहिं पंथ मिले दनुजारी। संग रमा सोइ राजकुमारी॥
नारद जी को जब ज्ञात हुआ कि स्वयं नारायण ने उनके साथ छल किया है, तो उनके क्रोध की सीमा ना रही । चले नारद जी विष्णु जी से मिलने और मन में सोचते जाते —
"बैकुंठ जाकर या तो विष्णु को शाप दूँगा या स्वयं प्राण दे दूँगा। उन्होंने जगत में मेरी हँसी कराई!"
किन्तु भगवान श्रीहरि उन्हें बीच रास्ते में ही मिल गए। इतना ही नहीं एक ओर लक्ष्मीजी और दूसरी ओर वही राजकुमारी विश्वमोहिनी को भी साथ में लिए ।
भगवान ने नारद जी से मीठी वाणी में पूछा—
"नारदजी ! इस प्रकार व्याकुल हो कहाँ चले ?"
ये शब्द सुनते ही नारद जी का क्रोध और भी बढ़ गया, माया के वशीभूत होने के कारण उन्हें होश ही नहीं रहा । लगे श्रीहरि को बुरा-भला बोलने ।
पर संपदा सकहु नहिं देखी। तुम्हरें इरिषा कपट बिसेषी॥
मथत सिंधु रुद्रहि बौरायहु। सुरन्ह प्रेरि बिष पान करायहु॥
असुर सुरा बिष संकरहि आपु रमा मनि चारु।
स्वारथ साधक कुटिल तुम्ह सदा कपट ब्यवहारु॥
परम स्वतंत्र न सिर पर कोई। भावइ मनहि करहु तुम्ह सोई॥
भलेहि मंद मंदेहि भल करहू। बिसमय हरष न हियँ कछु धरहू॥
नारद जी बोले—
तुम दूसरों की सुख-शांति नहीं देख सकते, तुम्हारे मन में ईर्ष्या और कपट बहुत है। समुद्र मथते समय भी तुमने शिवजी को बहला-फुसलाकर और देवताओं को प्रेरित करके उन्हें विषपान कराया ।
असुरों को मदिरा और शिवजी को विष देकर तुमने स्वयं लक्ष्मी और सुंदर (कौस्तुभ) मणि ले ली। तुम बड़े धोखेबाज और मतलबी हो। सदा छल- कपट का व्यवहार करते हो ।
तुम पूरी तरह स्वतंत्र हो, सिर पर तो कोई है नहीं तुम्हारे । जब जिसके साथ जो मन को करता है, उसके साथ वही करते हो। भले को बुरा और बुरे को भला कर देते हो। हृदय में हर्ष-विषाद कुछ भी नहीं लाते ।
कोई तुमसे कुछ नहीं बोलता लेकिन इस बार तुमने मुझे चुनौती दी है ।
तो जाइए मैं श्राप देता हूँ आपको—
१. जिस राजकुमार का रूप धारण करके आपने मेरे साथ छल किया है, आपको भी अब वही शरीर धारण करना पड़ेगा ।
२. मुझे आपने वानर बनाया है । जब आप मनुष्य-रूप धारण करेंगे, तब यही वानर आपकी सहायता करेंगे ।
३. आज जिस तरह मैं विश्वमोहिनी के लिए रो रहा हूँ ; एक दिन अपनी पत्नी के लिए आपको भी रोना पड़ेगा ।
भगवान मुस्कुराए और बोले —
"स्वीकार है ।"
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Jai shree ram
ReplyDeleteअति सुंदर कथा
ReplyDeleteजय श्री राम 🙏
ReplyDeleteजय श्री हनुमान 🙏